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(अव्यय )

अव्यय(अविकारी शब्द) की परिभाषा-

ऐसे शब्द जिन पर प्रायः लिंग, वचन, कारक संज्ञा और सर्वनाम का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। ये वाक्यों में जैसे के तैसे ही प्रयुक्त होते हैं, अव्यय कहलाते हैं। जैसे- जब, तब, कब, कहाँ, क्यों, कैसे, किसने, इधर, उधर, ऊपर, अरे, तथा, और, किन्तु, परन्तु, लेकिन क्योंकि, यहाँ, वहाँ, केवल, इत्यादि।

-विकार के आधार पर शब्द दो प्रकार के होते हैं-
  1. विकारी शब्द- जिनके रूप में परिवर्तन हो सकता है। (जैसे- संज्ञा, सर्वनाम, क्रिया, विशेषण इत्यादि।) 
  2. अविकारी शब्द जिनके रूप में कोई परिवर्तन नहीं होता है। (जैसे- क्रिया विशेषण, संबंधबोधक संज्ञा, समुच्चयबोधक, विस्मयादिबोधक, निपात इत्यादि।) 

अव्यय की पहिचान-

अव्यय की परिभाषा के अनुसार अव्यय ऐसे शब्दों को कहते हैं जिनका रूप परिवर्तित नहीं होता है। इसे पहिचानने के लिए वाक्य में दिए गए सभी शब्दों को अलग-2 लिखकर उनका रूप परिवर्तित करके देखें और इस प्रक्रिया में  जिस शब्द का रूप परिवर्तित नहीं हो सकता है उसे छाँट कर अलग कर दें। वह शब्द ही अव्यय है। 

इसे एक उदाहरण की सहायता से समझते हैं-  

1. वह आज जाएगा। 

           (शब्दपरिवर्तित रूप)

  • वहवो, उसका, उनका…….. 
  • जाएगाजा, जाता, जाना…… 
  • आज (परिवर्तित नहीं किया जा सकता है)

अव्यय के प्रकार-

हिंदी भाषा में अव्यय के पाँच प्रकार हैं-

  1. क्रिया विशेषण (ADVERB)
  2. संबंध बोधक (PREPOSITION)
  3. समुच्चय बोधक (CONJUCTION)
  4. विस्मयादि बोधक (EXCLAMATORY)
  5. निपात (PARTICLE)

क्रिया विशेषण(ADVERB)

क्रिया विशेषण (ADVERB)-

ऐसे अव्यय शब्द जो क्रिया की विशेषता( समय, स्थान, शैली, और परिमाण) बताते हैं क्रिया विशेषण कहलाते हैं। 

उदाहरण-  

  • वह आज आएगा। यहाँ आज आने की विशेषता बता रहा है।)

क्रिया विशेषण के प्रकार-

1. प्रयोग के आधार पर क्रिया विशेषण के प्रकार-

  1. साधारण क्रिया विशेषण 
  2. संयोजक क्रिया विशेषण 
  3. अनुबद्ध क्रिया विशेषण 
1. साधारण क्रिया विशेषण-

जिस क्रिया विशेषण का प्रयोग वाक्य में स्वतंत्र (इसका संबंध उपवाक्य से नहीं रहता है) रूप से होता होता है, उसे साधारण क्रिया विशेषण कहते हैं।  

 वाक्य उदाहरण-  

  • हाय ! मेरा पर्स कहाँ गया।
  • रामू , जल्दी घर आओ।
  • अब करें तो क्या करें?
2. संयोजक क्रिया विशेषण-

जिस क्रिया विशेषण का संबंध उपवाक्य के साथ रहता है, उसे संयोजक क्रिया विशेषण कहते हैं।  

 वाक्य उदाहरण-  

  • जब बारिश होंगी तब आओगे क्या?
  • जहाँ सद्बुद्धि तहाँ समृद्धि। 
  • जैसा काम वैसा दाम। 
3. अनुबद्ध क्रिया विशेषण-

जिस क्रिया विशेषण का प्रयोग निश्चय के लिए होता है, उसे अनुबद्ध क्रिया विशेषण कहते हैं।  

 वाक्य उदाहरण-  

  • मैंने जल तक नहीं पिया।  
  • मैंने आपके आने तक इंतजार किया। 

2. रूप के आधार पर क्रिया विशेषण के प्रकार-

  1. मूल 
  2. यौगिक 
  3. स्थानीय 
1. मूल क्रिया विशेषण-

जिस क्रिया विशेषण का प्रयोग उसके मूल रूप में किया जाता है, उसे मूल क्रिया विशेषण कहते हैं।  

 वाक्य उदाहरण-  

  • आप कब आओगे।  
  • मैं अचानक डर गया। 
2. यौगिक क्रिया विशेषण-

जिस क्रिया विशेषण का निर्माण दूसरे शब्द या प्रत्यय जोड़ने से होता है, उसे यौगिक क्रिया विशेषण कहते हैं। जैसे- दिन+भर=दिनभर, वहाँ+तक=वहाँ तक, चपके+से= चुपके से, रात+भर=रात भर आदि।   

 वाक्य उदाहरण-  

  • वह दिनभर खेलता रहा।  
  • मैं वहाँ तक जा रहा हूँ। 
  • उसने चुपके से हमला किया। 
  • वह रात भर सिसकती रही। 
3. स्थानीय क्रिया विशेषण-

जिस क्रिया विशेषण का प्रयोग बिना रूपांतर, विशेष स्थान पर होता है, उसे स्थानीय क्रिया विशेषण कहते हैं। 

 वाक्य उदाहरण-  

  • विराट कोहली बड़े क्रिकेटर हैं।   
  • वह दौड़ कर आता है। 

3. अर्थ के आधार पर क्रिया विशेषण के प्रकार-

अर्थ के अनुसार क्रिया विशेषण चार प्रकार के होते हैं-

  1. कालवाचक 
  2. स्थानवाचक
  3. रीतिवाचक
  4. परिमाणवाचक   
1. कालवाचक-

इस क्रिया विशेषण से क्रिया के होने के समय का बोध होता है। जैसे- आज, कल, परसों, अब, कब, जब, तब, पीछे, पहले, सदा, अभी, तुरन्त, प्रतिदिन, दिनभर, लगातार, सबेरे, बार-बार, प्रायः, बहुधा आदि।  

 > कभी-कभी एक कालवाचक क्रिया विशेषण दो बार एक साथ प्रयुक्त होता है और कभी-2 दो अलग कालवाचक क्रिया विशेषण एक साथ प्रयुक्त होते हैं।   

  • मैं अभी-अभी बाहर से आया हूँ। (यहाँ अभी क्रिया विशेषण शब्द दो बार आया है) 
  • मैं आज-कल बाहर नहीं जाता हूँ। (यहाँ आज, कल दो क्रिया विशेषण शब्द एक साथ प्रयुक्त हुए हैं) 

वाक्य उदाहरण-  

  • श्याम आज बाजार जाएगा।
  • वसुधा कल हमारे घर आएगी।
  • चमेली परसों घूमने जाएगी।
  • अब बहुत देर हो चुकी है।
  • आप कब आओगे।
  • जब जाना हो मुझे बता देना।
  • आप लाइन में थे, तब मैं आपके पीछे खड़ा था।
  • मैं आपसे पहले आया था।
  • गरिमा सदा घूमती रहती है।
  • मालिक ने नौकर को अभी बुलाया है।
  • तुम तुरन्त हाजिर हो।
  • प्रतिदिन अनाज के दाम गिरते जा रहे हैं।
  • वह दिनभर खाता रहता है।
  • वह लगातार मेरा पीछा कर रहा था।
  • भानू सबेरे जल्दी उठ जाता है।
  • मरीज की तबियत बार-बार बिगड़ रही है।
  • वह प्रायः यहाँ आता रहता है।
2. स्थानवाचक-

इस क्रिया विशेषण से क्रिया के होने वाले स्थान का बोध होता है। जैसे- ऊपर, नीचे, इधर-उधर, यहाँ, वहाँ, आगे, पीछे, बाहर, भीतर, अगल-बगल, जहाँ, तहाँ, चारों ओर आदि।  

वाक्य उदाहरण-  

  • श्याम ऊपर रहता है। 
  • वसुधा नीचे गई है।
  • चमेली इधर-उधर घूमती रहती है।
  • आप यहाँ खड़े हो जाइये।
  • राम वहाँ गया है।
  • वह आगे गया है।
  • रमेश पीछे बैठा है।
  • रमा बाहर घूम रही है।
  • कल्याण भीतर घुस गया है।
  • वह मेरे अगल-बगल घूमता रहता है।
  • आपको जहाँ जाना है जाइये।
  • चारों ओर अंधकार छाया हुआ है।
3. रीति(शैली)वाचक-

इस क्रिया विशेषण से क्रिया की रीति (क्रिया के होने की शैली) का बोध होता है। जैसे- धीरे-धीरे, अचानक, सचमुच, अवश्य ही, अतः, इसलिए, मात्र, भर, फटाफट, जैसे-तैसे, कैसे, यथा संभव, आजीवन, निःसंदेह आदि।  

वाक्य उदाहरण-  

  • श्याम धीरे-धीरे खाता है। 
  • मुरली अचानक मेरे घर आ गया।
  • वह पछी सचमुच उड़ता है।
  • रंगीली अवश्य ही इस प्रतियोगिता में भाग लेगी।
  • अतः आप यहाँ पधारिए।
  • इसलिए वह गुस्सा हुआ था।
  • मुझे मात्र दस रुपये की जरूरत है।
  • मुट्ठी भर सैनिकों ने किले पर कब्जा कर लिया।
  • फटा-फट खाना खा लो।
  • जैसे-तैसे मैं यह कार्य पूरा कर पाया हूँ।
  • आप यहाँ तक कैसे पहुँचे।
  • यथा संभव यह कार्य पूरा हो जाएगा।
  • निःसंदेह वह आज आएगा।
4. परिमाणवाचक-

इस क्रिया विशेषण से क्रिया के परिमाण (मात्रा या संख्या) का बोध होता है। जैसे- बहुत, बड़ा, कुछ, थोड़ा, काफी, बिल्कुल, अत्यंत, तिल-तिल, एक-एक करके, अधिक, अधिकाधिक, केवल, यथेष्ट, थोड़ा-थोड़ा, अतिशय, लगभग, प्रायः आदि।  

वाक्य उदाहरण-  

  • श्याम बहुत खाता है। 
  • राम बड़ा तेज दौड़ता है।
  • तुम कुछ काम क्यों नहीं करते।
  • रमा थोड़ा आराम कर लिया करो।
  • मैं तिल-तिल मर रहा हूँ।
  • एक-एक करके दौड़िए।
  • वह लगभग मर गया था।
  • यह अत्यंत सुखद अनुभव है।

संबंधबोधक (PREPOSITION)

संबंधबोधक (PREPOSITION)-

ऐसे अव्यय शब्द जो संज्ञा/सर्वनाम का अन्य संज्ञा या सर्वनाम के साथ संबंध का बोध करते हैं संबंधबोधक कहलाते हैं। जैसे- के पास, के सामने, से पहले, से आगे, की ओर, की जगह, दूर के, दूर से, के आगे, के साथ इत्यादि।  

संबंधबोधक के प्रकार-

1. व्युत्पत्ति के आधार पर संबंधबोधक के प्रकार-

व्युत्पत्ति के आधार पर संबंधबोधक अव्यय 2 प्रकार के होते हैं-
 
  1. मूल संबंधबोधक  
  2. यौगिक संबंधबोधक  
1. मूल संबंधबोधक-

मूल संबंधबोधकों की संख्या बहुत कम है। जैसे- बिना, पर्यंत, नाईं, समेत, पूर्वक इत्यादि।  

2. यौगिक संबंधबोधक-

यौगिक संबंधबोधक विभिन्न प्रकार के शब्द भेदों से बनते हैं।  

जैसे-  

  • संज्ञा से- और, अपेक्षा, वास्ते, पलटे, विषय, लेखे इत्यादि। 
  • विशेषण से- जैसे, ऐसा, योग्य, सरीखे, तुल्य, समान, उलटा इत्यादि। 
  • क्रिया से- लिए मारे, जान करके इत्यादि। 
  • क्रिया विशेषण से- भीतर, बाहर, पास, परे, पीछे, यहाँ, ऊपर इत्यादि। 

2. प्रयोग के आधार पर संबंधबोधक के प्रकार-

प्रयोग के आधार पर संबंधबोधक अव्यय 2 प्रकार के होते हैं-
 
  1. संबद्ध संबंधबोधक  
  2. अनुबद्ध संबंधबोधक  
1. संबद्ध संबंधबोधक-

यह संबंध सूचक संज्ञाओं की विभक्तियों के बाद प्रयुक्त होते हैं। 

उदाहरण-  

  • दर्द के मारे 
  • राम के तुल्य
  • युद्ध से पहले
  • घर के बाहर
2. अनुबद्ध संबंधबोधक-

यह संबंध सूचक संज्ञा के विकृत रूप के साथ आते हैं। 

उदाहरण-  

  • मित्रों सहित
  • सपुत्रों समेत

3. अर्थ के आधार पर संबंधबोधक के प्रकार-

अर्थ के आधार पर संबंधबोधक अव्ययों के 12 प्रकार होते हैं- 
1. कालवाचक संबंधबोधक अव्यय-

जिन अव्यय शब्दों से समय/काल का पता चलता है उन्हें कालवाचक संबंधबोधक अव्यय कहते हैं। जैसे- आगे, पीछे, पूर्व, बाद, पहले, उपरांत, पश्चात, लगभग इत्यादि। 

वाक्य उदाहरण-  

  • कृष्ण बलराम के बाद पैदा हुए थे। 
  • पूजा से पहले सभी ने स्नान किया।
  • खाने से पूर्व हम पानी पी सकते हैं।
  • इस पकवान के पश्चात मिठाई खाना अच्छा होता है।
  • वह मेरे से लगभग पाँच मिनट बाद आया।
2. स्थानवाचक संबंधबोधक अव्यय-

जिन अव्यय शब्दों से स्थान का पता चलता है उन्हें स्थानवाचक संबंधबोधक अव्यय कहते हैं। जैसे- आगे, पीछे, ऊपर, नीचे, निकट, समीप, पास, नजदीक, बाहर, दूर, यहाँ, बीच, तले, सामने इत्यादि। 

वाक्य उदाहरण-  

  • राम मेरे घर के सामने वाले घर में रहता है। 
  • आप बाहर जा सकते हैं।
  • मेरे पीछे आकर बैठो।
  • स्तम्भ के निकट जाकर खड़े हों।
  • नीचे मेरा इंतजार करना।

3. दिशावाचक संबंधबोधक अव्यय-

जिन अव्यय शब्दों से दिशा का पता चलता है उन्हें दिशासूचक संबंधबोधक अव्यय कहते हैं। जैसे- ओर, तरफ, पार, आर-पार, आस-पास, प्रति इत्यादि। 

वाक्य उदाहरण-  

  • अपनी तरफ देखो फिर निर्णय लो। 
  • मेरी ओर से सब माँफ हैं।
  • उस पार एक डाकू रहता है।
  • हर व्यक्ति को समाज के प्रति अपना कर्तव्य निभाना चाहिए।
  • हमारे आस-पास का माहौल खराब है।

4. साधनसूचक संबंधबोधक अव्यय-

जिन अव्यय शब्दों से साधन का पता चलता है उन्हें साधनसूचक संबंधबोधक अव्यय कहते हैं। जैसे- द्वारा, जरिए, सहारे, हाथ, मारफ़त, जबानी, करके इत्यादि। 

वाक्य उदाहरण-  

  • मैं अपने हाथ से पाप नहीं करूँगा। 
  • आपके द्वारा यह पुण्य काम किया जा रहा है। 
  • इस यात्रा के जरिए हम भारत दर्शन कर पाएंगे।
  • अब हमारी जिंदगी आपके सहारे ही बीतेगी।

5. हेतुवाचक संबंधबोधक अव्यय-

जिन अव्यय शब्दों से त्याग या अभाव का बोध होता है हेतुवाचक संबंधबोधक अव्यय कहलाते हैं। जैसे- लिए, वास्ते, खातिर, रहित, सिवा, हेतु, निमित्त, मारे इत्यादि। 

वाक्य उदाहरण-  

  • आपके लिए तो जान न्योछावर है। 
  • माता-पिता की खातिर वह शहर छोड़ कर नहीं गया। 
  • यह पकवान मिलावट रहित है।
  • आपके सिवा मेरा इस दुनियाँ में कोई नहीं है। 
  • रमेश आपके वास्ते यहाँ तक आया था। 

6. विषयवाचक संबंधबोधक अव्यय-

जिन अव्यय शब्दों से किसी विषय या संदर्भ का पता चलता है उन्हें विषयवाचक संबंधबोधक अव्यय कहते हैं। जैसे- बाबत, निस्बत, भरोसे, जान, मद्दे, लेखे, विषय, नाम(नामक) इत्यादि। 

वाक्य उदाहरण-  

  • सरकारी सहारे के भरोसे वह यहाँ पर बैठा हुआ है।  
  • आतंकबाद का विषय बड़ा ही संवेदनशील है। 
  • भस्मासुर नाम का राक्षस बड़ा ही शक्तिशाली था।
  • यह बंगला उनके बाबत बनवाया गया था।

7. विरोधवाचक संबंधबोधक अव्यय-

जिन अव्यय शब्दों से विरोध, विपरीत या प्रतिकूलता का पता चलता है उन्हें विरोधवाचक संबंधबोधक अव्यय कहते हैं। जैसे- विपरीत, खिलाफ, प्रतिकूल, विरुद्ध, उलटा इत्यादि। 

वाक्य उदाहरण-  

  • भारत ने आतंकबाद के खिलाफ अभियान चलाया है।   
  • यह नेता अपनी पार्टी की विचारधारा के विरुद्ध कार्य करता है। 
  • अभी परिस्तिथियाँ हमारी क्षमता के प्रतिकूल है।
  • वह हमेशा मेरे विपरीत सोचता है।
  • वह हमेशा हर काम उल्टे तरीके से करता है।

8. समतासूचक / तुलनावाचक संबंधबोधक अव्यय-

जिन अव्यय शब्दों से समता / तुलना का पता चलता है उन्हें समतावाचक / तुलनावाचक संबंधबोधक अव्यय कहते हैं। जैसे- अपेक्षा, जैसा, वैसा, समान, आगे, सामने इत्यादि। 

वाक्य उदाहरण-  

  • राधे की अपेक्षा मनोज अधिक होशियार है।   
  • राम जैसा मर्यादा पुरुष आज तक पैदा नहीं हुआ।  
  • इस गाड़ी के आगे सब गाडियाँ बेकार हैं। 
  • अभी अमेरिका के समान ताकतवर, विश्व में कोई देश नहीं है।
  • रंगीली की सुंदरता के सामने क्लास की सब लड़कियाँ सुन्दर लगती हैं।

9. सीमावाचक संबंधबोधक अव्यय-

जिन अव्यय शब्दों से सीमा या परिणाम का पता चलता है उन्हें सीमावाचक संबंधबोधक अव्यय कहते हैं। जैसे- तक, मात्र, भर, पर्यंत, लौं इत्यादि। 

वाक्य उदाहरण-  

  • भारत उत्तर में कश्मीर और दक्षिण में कन्याकुमारी तक फैला हुआ है।   
  • मुझे मात्र दस हजार रुपये की जरूरत है।  
  • नेपोलियन ने मुट्ठी भर सैनिकों से दुनिया पर राज किया। 
  • मैं जीवन पर्यंत आपकी सेवा करता रहूँगा।

10. सहचरवाचक संबंधबोधक अव्यय-

जिन अव्यय शब्दों से सहयोग / साथ का पता चलता है उन्हें सहचरवाचक संबंधबोधक अव्यय कहते हैं। जैसे- सहित, समेत, साथ, संग, वश, स्वाधीन, पूर्वक, अधीन इत्यादि। 

वाक्य उदाहरण-  

  • उसके साथ बीस लोग और थे।   
  • आजकल पाकिस्तान, चीन के वश में है।  
  • हम आपके संग मिलकर इस पुण्य के भागीदार बनेंगे। 
  • यह सारा साम्राज्य मेरे अधीन है।

11. कारणवाचक संबंधबोधक अव्यय-

जिन अव्यय शब्दों से किसी कार्य के कारण या उद्देश्य का पता चलता है उन्हें कारणवाचक संबंधबोधक अव्यय कहते हैं। जैसे- कारण, खातिर, हेतु, निमित्त, वास्ते इत्यादि। 

वाक्य उदाहरण-  

  • कड़ी मेहनत के कारण ही आज उसने प्रथम स्थान अर्जित किया है।   
  • देश के सम्मान की खातिर सैनिकों ने जान की बाजी लगा दी।  
  • तुम्हारे वास्ते आज मैं यहाँ पर हूँ। 
  • यह सुरक्षा कर्मी आपकी सुरक्षा हेतु प्रदान किए जाते हैं।

12. संग्रहवाचक संबंधबोधक अव्यय-

जिन अव्यय शब्दों से किसी समूह / संग्रह का पता चलता है उन्हें संग्रहवाचक संबंधबोधक अव्यय कहते हैं। जैसे- भर, मात्र, तक, समेत इत्यादि। 

वाक्य उदाहरण-  

  • देश भर में खुशी का माहौल है।   
  • उसके साथ मात्र बीस हजार सैनिक थे।  
  • वह दस दिन तक मेरे साथ रहेगा। 
  • आज पुलिस समेत राजनेता भी हमारे यहाँ पधारे।

समुच्चयबोधक (CONJUCTION)

समुच्चयबोधक (CONJUCTION)-

ऐसे अव्यय शब्द जो “शब्दों, वाक्यों या वाक्यांशों” को परस्पर जोड़ने या अलग करने का कार्य करते हैं उन्हें समुच्चयबोधक अव्यय कहते हैं। जैसे- या, और, इसलिए, यदि, तो, क्योंकि, केवल, यहाँ, वहाँ, किन्तु इत्यादि।  

वाक्य उदाहरण-  

  • तुम खाना खाओ और सो जाओ। 
  • पढ़ाई करो या कक्षा से बाहर निकलो।
  • मैं भूखा था इसलिए मैंने चोरी की।
  • यदि आप आओगे तो मैं भी आऊँगा।
  • वह यहाँ केवल आपसे मिलने आता है।

समुच्चयबोधक के प्रकार-

समुच्चयबोधक अव्यय 2 प्रकार के होते हैं-
 
  1. समानाधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय   
  2. व्याधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय  

1. समानाधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय -

ऐसे अव्यय शब्द जिनके द्वारा दो या अधिक स्वतंत्र पदों या वाक्यों को जोड़ा जाता है, समानाधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय कहलाते हैं।  

यह छः प्रकार के होते हैं-  

  1. संयोजक समानाधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय 
  2. विभाजक समानाधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय 
  3. विकल्पसूचक समानाधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय 
  4. विरोधसूचक समानाधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय 
  5. परिणामसूचक समानाधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय 
  6. वियोजक समानाधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय 
1. संयोजक समानाधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय-

इनके द्वारा दो या अधिक पदों/वाक्यों को जोड़ा जाता है। जैसे- और, एवं, तथा, भी, व इत्यादि। 

वाक्य उदाहरण-  

  • अजय और विजय पढ़ने जा रहे हैं। 
  • राम, लक्ष्मण, भरत एवं  शत्रुध्न भाई-भाई थे।
  • अध्यापक तथा विद्यार्थी मैदान में खड़े हुए थे।
  • विमला ने अपनी पड़ोसी संध्या को भी आमंत्रित किया है।
2. विभाजक समानाधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय -

इनके द्वारा दो या अधिक पदों/वाक्यों में से एक का गृहण अथवा दोनों का त्याग होता है। जैसे- या, अथवा, मगर, नहीं तो, परन्तु, या-या, चाहे-चाहे, क्या-क्या, न-न, न कि, ताकि, तो, अन्यथा, वा इत्यादि। 

वाक्य उदाहरण-  

  • मुझे यहाँ जाना चाहिए या वहाँ। 
  • मुझे कोई अच्छी रचना अथवा अच्छा रचनाकार बताइए।
  • मैं तो खाना, खाना चाहता हूँ मगर डॉक्टर खाने नहीं देता।
  • बेटा मेरी बात सुनो नहीं तो पछताओगे।
  • तुम यहाँ से चले जाओ ताकि मैं पढ़ सकूँ।
3. विकल्पसूचक समानाधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय -

इनके द्वारा दो या अधिक पदों/वाक्यों में से विकल्प का बोध होता है। जैसे- या, अथवा, कि, अन्यथा इत्यादि। 

वाक्य उदाहरण-  

  • मुझे पौष्टिक आहार या दवाइयाँ खानी चाहिए। 
  • इस दौड़ में, मैं दौड़ूँगा अथवा राम दौड़ेगा।
  • तुम्हें आना होगा अन्यथा मुझे आना पड़ेगा।
  • बेटा मेरी बात सुनो नहीं तो पछताओगे।
  • इस दुकान से सामान खरीदना है कि उस दुकान से।
4. विरोधसूचक समानाधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय  -

इनके द्वारा दो पदों/वाक्यों में से पहले की सीमा को सूचित किया जाता है। जैसे- किन्तु, परन्तु, लेकिन, मगर, पर, वरन, बल्कि इत्यादि। 

वाक्य उदाहरण-  

  • मैं केवल एक अच्छा पिता ही नहीं किन्तु एक अच्छा पुत्र भी हूँ। 
  • तुम चालक हो, परन्तु वह महाचालक है।
  • मैंने उसकी सहायता की लेकिन वह स्वार्थी निकला।
  • मैंने उससे बात करने की कोशिश की मगर उसने एक नहीं सुनी।
  • भगवान की मर्जी वह जाने पर मुझे अच्छा कर्म करना चाहिए।
5. परिणामसूचक समानाधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय  -

इनके द्वारा यह पता चलता है कि आगे के वाक्य का अर्थ पिछले वाक्य के अर्थ का फल है। जैसे- इसलिए, सो, अतः, एतएव, परिणामस्वरूप इत्यादि। 

वाक्य उदाहरण-  

  • तुमने कड़ी मेहनत की इसलिए तुम इतने ऊँचे पद पर हो। 
  • यह गेंद तुम्हारी नहीं है, अतः उसको दे दो।
  • भारी बारिश के परिणामस्वरूप, मैच रद्द हो गया।
  • मैंने उससे बात करने की कोशिश की मगर उसने एक नहीं सुनी।
  • मैं बहुत भूखा था सो मैंने फल खा लिए।
6. वियोजक समानाधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय   -

इनके द्वारा एक को जोड़ते समय दूसरे को त्यागने का बोध होता है। जैसे- या, अथवा, न इत्यादि। 

वाक्य उदाहरण-  

  • यह काम तुमने या उसने बिगाड़ा है। 
  • कपड़े उठा लो अथवा बारिश में भीग जाएंगे।
  • न तुम अच्छे हो न तुम्हारा खानदान।

2. व्याधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय  -

ऐसे अव्यय शब्द जिनके द्वारा एक वाक्य से एक या अधिक आश्रित वाक्य जोड़े जाते है, उन्हें व्याधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय कहते हैं।  

यह चार प्रकार के होते हैं-  

  1. कारणवाचक व्याधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय 
  2. उद्देश्यवाचक व्याधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय
  3. संकेतवाचक व्याधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय
  4. रूपवाचक व्याधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय
1. कारणवाचक व्याधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय -

ऐसे अव्यय शब्द जिनके पश्चात आरंभ होने वाले वाक्य पहले वाक्य का समर्थन करते हैं(कारण बताते हैं)। कारणवाचक व्याधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय कहलाते हैं। जैसे-क्योंकि, जोकि, इसलिए इत्यादि। 

वाक्य उदाहरण-  

  • तुम पढ़ाई में बहुत तेज हो  क्योंकि तुम बहुत मेहनत करते हो। 
  • रमेश मेरा सगा भाई है जोकि बहुत तेज दौड़ता है।
  • वह लड़का बहुत शोर मचा रहा था इसलिए अध्यापक ने उसे डाँट लगाई।
2. उद्देश्यवाचक व्याधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय -

ऐसे अव्यय शब्द जिनके पश्चात आने वाला वाक्य दूसरे वाक्य का उद्देश्य सूचित करता है। उद्देश्यवाचक व्याधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय कहलाते हैं। जैसे-कि, जो, ताकि, इसलिए कि इत्यादि। 

वाक्य उदाहरण-  

  • तुम बाजार जा रहे हो कि मैं किसी और को भेज दूँ। 
  • मैं यह शहर छोड़ रहा हूँ, ताकि आप सब शांतिपूर्वक रह सकें।
  • अपना समान यहाँ रख दो इसलिए कि किसी को कोई आपत्ति न हो। 
3. संकेतवाचक व्याधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय -

ऐसे अव्यय शब्द जो जोड़े मैं आते हैं और पूर्व वाक्य में वर्णित घटना से उत्तर वाक्य की घटना का संकेत पाया जाता है। संकेतवाचक व्याधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय कहलाते हैं। जैसे-जो-तो, यदि-तो, यद्यपि -तथापि(तो-भी), चाहे-परंतु, इत्यादि। 

वाक्य उदाहरण-  

  • जो तू सच बोल रहा है तो फिर डर किस बात का। 
  • यदि मैं शहर गया तो दवा अवश्य लेकर आऊँगा। 
  • यद्यपि अध्यापक अच्छा पढ़ाते हैं तदापि बच्चे पढ़ते ही नहीं। 
  • आप चाहे जो मर्जी कर लो परन्तु वह सुधारने वाला नहीं है। 
4. रूपवाचक व्याधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय -

ऐसे अव्यय शब्द जिनके द्वारा जोड़े गये पद/वाक्य में पूर्व वाक्य का स्वरूप, पश्चात वाक्य से जाना जाता है। रूपवाचक व्याधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय कहलाते हैं। जैसे-कि, जो, अर्थात, यानि, मानो इत्यादि। 

वाक्य उदाहरण-  

  • मेरा मन कर रहा है कि कहीं चला जाऊँ। 
  • यही वह भाषा है जो लोगों में समरसता लाती है। 
  • वह शांत खड़ा था मानो कि मूर्ति बन गया हो।
  • वह प्रतिदिन व्यायाम करता है अर्थात अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखता है। 

विस्मयादिबोधक (EXCLAMATORY)

विस्मयादिबोधक (EXCLAMATORY)-

ऐसे अव्यय शब्द जो “वक्ता या लेखक के मनोभाव (भय, शोक, घृणा, आश्चर्य)” को प्रकट करते हैं। इन शब्दों का संबंध वाक्य से नहीं रहता है। इस शब्दों के अंत में विस्मयादिबोधक(!) चिन्ह का प्रयोग होता है। 

वाक्य उदाहरण-  

  • वाह ! क्या बात है। 
  • अरे ! तुम अभी तक यहीं खड़े हो।  

विस्मयादिबोधक के प्रकार-

विस्मयादिबोधक मुख्य रूप से निम्न प्रकार के होते हैं-
 
  1. आश्चर्य बोधक / विस्मयादि बोधक    
  2. हर्षबोधक
  3. आशीर्वाद बोधक
  4. शोक बोधक  
  5. भय बोधक  
  6. स्वीकृति बोधक  
  7. संबोधन बोधक  
  8. अनुमोदन बोधक  
  9. तिरस्कार बोधक  
  10. विवशता बोधक
  11. विदास बोधक  
1. आश्चर्य बोधक / विस्मयादि बोधक-

 जिन अव्यय शब्दों से “आश्चर्य, हैरानी या अविश्वास का भाव प्रकट होता है, उन्हें आश्चर्य बोधक/विस्मयादिबोधक अव्यय शब्द कहते हैं। जैसे- वाह !, क्या !, वाह वा !, हैं !, अरे !, ऐ !, ओहो !, सच ! इत्यादि। 

वाक्य उदाहरण-  

  • वाह ! क्या खाना बनाया है। 
  • क्या ! तुम अभी तक यहीं खड़े हो। 
  • वाह वा ! क्या बात है।
  • हैं ! वह अभी तक जिंदा है। 
  • अरे ! तुम यहाँ पर हो। 
2. हर्ष बोधक-

जिन अव्यय शब्दों से “हर्ष, उल्लास, प्रसन्नता, उत्सव, या आनंद का भाव प्रकट होता है, उन्हें हर्ष बोधक अव्यय शब्द कहते हैं। जैसे- वाह !, आहा !, धन्य !, जय !, जयति ! इत्यादि। 

वाक्य उदाहरण-  

  • आहा ! मजा आ गया। 
  • वाह ! क्या सुन्दर इमारत है। 
  • धन्य ! जो आप यहाँ पधारे।
  • शाबाश ! ऐसे ही उन्नति करते रहो। 
  • जय ! भवानी। 
3. आशीर्वाद बोधक-

जिन अव्यय शब्दों से “शुभकामना, मँगलभावना या आशीर्वाद का भाव प्रकट होता है, उन्हें आशीर्वाद बोधक अव्यय शब्द कहते हैं। जैसे- जीते रहो !, दीर्घायु हो ! इत्यादि। 

वाक्य उदाहरण-  

  • जीते रहो ! शिष्य। 
  • दीर्घायु हो ! बेटा। 
4. शोक बोधक-

जिन अव्यय शब्दों से “दुख, पीड़ा या मृत्यु का भाव प्रकट होता है, उन्हें शोकबोधक अव्यय शब्द कहते हैं। जैसे- हाय !, बाप रे बाप !, आह !, उफ़ !, ओह !, हे राम !, त्राहि-त्राहि ! इत्यादि। 

वाक्य उदाहरण-  

  • हाय ! यह क्या हो गया। 
  • बाप रे बाप ! कितनी गहरी चोट है। 
  • आह ! मुझे दवाई दे दो। 
  • हे राम ! मुझे मुक्ति दे दो। 
  • ओह ! तुम कहाँ चले थे। 
5. भय बोधक-

जिन अव्यय शब्दों से “डर, दहशत या संकट का भाव प्रकट होता है, उन्हें भय बोधक अव्यय शब्द कहते हैं। जैसे- बाप रे बाप !, हाय !, ओह !, ऊई माँ ! इत्यादि। 

वाक्य उदाहरण-  

  • बाप रे बाप ! कितना बड़ा सांप है?
  • हाय ! मेरा सामान किसने चोरी कर लिया? 
  • ऊई माँ ! मैं तो फिसल गया होता। 
  • ओह ! कितना अंधेरा है? 
6. स्वीकृति बोधक-

जिन अव्यय शब्दों से “स्वीकृति या सहमति का भाव प्रकट होता है, उन्हें स्वीकृति बोधक अव्यय शब्द कहते हैं। जैसे- हाँ !, जी हाँ !, अच्छा !, जी !, ठीक !, बहुत !, अच्छा! इत्यादि। 

वाक्य उदाहरण-  

  • हाँ ! यह कार्य मैंने किया है।
  • जी हाँ ! वह यहीं पर रहते हैं।  
  • अच्छा ! तो आप है मिस्टर परफेक्ट। 
  • जी ! वह मेरा बेटा है।  
  • ठीक ! आज से यह आपकी जिम्मेदारी है।  
7. संबोधन बोधक-

जिन अव्यय शब्दों से “किसी को बुलाने, ध्यान आकर्षित करने या पुकारने/संबोधित करने का भाव प्रकट होता है, उन्हें संबोधन बोधक अव्यय शब्द कहते हैं। जैसे- अजी !, ओ !, रे !, री !, अरे !, ऐ !, हो !, हैलो ! इत्यादि। 

वाक्य उदाहरण-  

  • अजी ! सुनते हो।
  • ओ ! अमीरजादे की औलाद।  
  • अरे ! धर्मेन्द्र जी सुनिए। 
  • हैलो ! यह किसका सामान है।  
8. अनुमोदन बोधक-

जिन अव्यय शब्दों से “समर्थन या अनुमोदन का भाव प्रकट होता है, उन्हें अनुमोदन बोधक अव्यय शब्द कहते हैं। जैसे- ठीक !, वाह !, अच्छा !, शाबाश !, अवश्य ! इत्यादि। 

वाक्य उदाहरण-  

  • ठीक ! आपने यह अच्छा किया।
  • वाह ! ऐसे ही अच्छे अंक हमेशा प्राप्त करते रहिए।  
  • अच्छा ! मुझे आपकी मदद चाहिए। 
  • शाबाश ! इसी तरह से खेल जारी रखें।
  • अवश्य ! मैं आपका साथ दूँगा।
9. तिरस्कार बोधक-

जिन अव्यय शब्दों से “अपमान, विरोध या घृणा का भाव प्रकट होता है, उन्हें तिरस्कार बोधक अव्यय शब्द कहते हैं। जैसे- हट !, अरे !, दूर !, धिक् !, चुप !, थू !, छिः ! इत्यादि। 

वाक्य उदाहरण-  

  • हट ! पापी कहीं का।
  • अरे ! हाथ मत लगाना इसे।  
  • दूर ! मेरे नजदीक मत आना। 
  • चुप ! अब और एक शब्द भी नहीं।
  • थू ! कितना नीच है तू।
10. विवशता बोधक-

जिन अव्यय शब्दों से “मजबूरी, निराशा या काश का भाव प्रकट होता है, उन्हें विवशता बोधक अव्यय शब्द कहते हैं। जैसे- हे भगवान !, काश !, कदाचित ! इत्यादि। 

वाक्य उदाहरण-  

  • हे भगवान ! अब तो मेरे कष्ट हर लो।
  • काश ! मैं इस कठिन घड़ी में आपकी मदद कर पाता।  
11. विदास बोधक-

जिन अव्यय शब्दों से “विछड़ने या विदा होने का भाव प्रकट होता है, उन्हें विदास बोधक अव्यय शब्द कहते हैं। जैसे- अच्छा जी !, अच्छा !, टा-टा ! इत्यादि। 

वाक्य उदाहरण-  

  • अच्छा जी ! अब हम चलते हैं।
  • अच्छा ! अब हमें विदा कीजिए।  
  • टा-टा ! फिर मिलेंगे। 

निपात (PARTICLE)

निपात (PARTICLE)-

ऐसे अव्यय शब्द जो “वाक्यों में अतिरिक्त भार / नवीन अर्थ लाने के लिए प्रयोग किए जाते है” निपात कहलाते हैं। जैसे- तो, भी, ही, तक, क्या, काश, लगभग, ठीक, करीब, मात्र, सिर्फ, हाँ, न, नहीं, मत इत्यादि। 

वाक्य उदाहरण-  

  • मैं तो वहीं पर खड़ा है। 
  • तुम अभी तक कहाँ थे। 
  • ऐसा क्या खा लिया तुमने। 
  • काश मैं भी अमीर होता। 
  • नहीं मुझे तुम्हारी मदद नहीं चाहिए। 

निपात के प्रकार-

निपात मुख्यतया नौ प्रकार के होते हैं-
 
  1. स्वीकारार्थक निपात अव्यय     
  2. नकारात्मक निपात अव्यय
  3. निषेधार्थक निपात अव्यय
  4. प्रश्नबोधक निपात अव्यय  
  5. विस्मयार्थक निपात अव्यय  
  6. बलदायक निपात अव्यय  
  7. तुलनार्थक निपात अव्यय  
  8. अवधारणार्थक निपात अव्यय  
  9. आदरसूचक निपात अव्यय    
1. स्वीकारार्थक निपात अव्यय-

ऐसे निपात अव्यय शब्द जिनसे “सहमति या स्वीकृति का बोध होता है”, स्वीकारबोधक निपात अव्यय कहलाते हैं। जैसे- हाँ, जी, जी हाँ इत्यादि। 

वाक्य उदाहरण-  

  • हाँ, यह मेरा ही घर है। 
  • जी, मैं यह कर सकता है। 
  • जी हाँ, आप मेरे साथ आ सकते है।
2. नकारबोधक निपात अव्यय-

ऐसे निपात अव्यय शब्द जिनसे “इनकार या अस्वीकृति का बोध होता है”, नकारबोधक निपात अव्यय कहलाते हैं। जैसे- जी नहीं, नहीं, न इत्यादि। 

वाक्य उदाहरण-  

  • जी नहीं, आप यहाँ खड़े नहीं हो सकते हैं। 
  • नहीं, यह आपका बच्चा नहीं है। 
  • न, मैं यह आपको नहीं दे सकता।
3. निषेदार्थक निपात अव्यय-

ऐसे निपात अव्यय शब्द जिनसे “किसी कार्य को न करने/ मनाही का बोध होता है”, निषेदार्थक निपात अव्यय कहलाते हैं। जैसे- मत  

वाक्य उदाहरण-  

  • मत खाओ, खाना बहुत गरम है। 
4. प्रश्नबोधक निपात अव्यय-

ऐसे निपात अव्यय शब्द जिनसे “प्रश्न करने या जिज्ञासा व्यक्त करने का बोध होता है”, प्रश्न बोधक निपात अव्यय कहलाते हैं। जैसे- क्या, न, इत्यादि। 

वाक्य उदाहरण-  

  • क्या, मैं आपके साथ आ सकता हूँ।
5. विस्मयार्थक निपात अव्यय-

ऐसे निपात अव्यय शब्द जिनसे “आश्चर्य, हर्ष या अचरज का बोध होता है”, विस्मयार्थक निपात अव्यय कहलाते हैं। जैसे- क्या, काश इत्यादि। 

वाक्य उदाहरण-  

  • क्या, मैं भी पास हो गया।
  • काश, मेरे पास अपार धन होता।
6. बलदायक निपात अव्यय-

ऐसे निपात अव्यय शब्द जिनसे “किसी बात पर बल या जोर देने का बोध होता है”, बलदायक निपात अव्यय कहलाते हैं। जैसे- तो, ही, भी, तक इत्यादि। 

वाक्य उदाहरण-  

  • राम तो, वन में चले गये।
  • तुम ही, मेरी मदद कर सकते हो।
  • मैं भी, आपके सात आऊँगा।
  • अभी तक, तुम यहाँ क्या कर रहे हो।
7. तुलनार्थक निपात अव्यय-

ऐसे निपात अव्यय शब्द जिनसे “किसी बात की तुलना या समानता का बोध होता है”, तुलनार्थक निपात अव्यय कहलाते हैं। जैसे- सा इत्यादि। 

वाक्य उदाहरण-  

  • मैंने आप सा, बलवान योद्धा नहीं देखा।
8. अवधारणार्थक निपात अव्यय-

ऐसे निपात अव्यय शब्द जिनसे “किसी समय, मात्रा, या अनुमान का बोध होता है”, अवधारणार्थक निपात अव्यय कहलाते हैं। जैसे- ठीक, करीब, लगभग, तकरीबन इत्यादि। 

वाक्य उदाहरण-  

  • ठीक, दस बजे कार्यालय खुलेगा। 
  • करीब, पाँच बजे ट्रेन आएगी। 
  • लगभग, बीस लोग थे वहाँ पर।
  • तकरीबन, आधा किलोमीटर की दूरी पर लाइटहाउस है।
9. आदरसूचक निपात अव्यय-

ऐसे निपात अव्यय शब्द जिनसे “आदर या सम्मान का बोध होता है”, आदरसूचक निपात अव्यय कहलाते हैं। जैसे- जी इत्यादि। 

वाक्य उदाहरण-  

  • जी, मैं अभी आपका काम कर देता हूँ।

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