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(अव्यय )

अव्यय(अविकारी शब्द) की परिभाषा-

ऐसे शब्द जिन पर प्रायः लिंग, वचन, कारक संज्ञा और सर्वनाम का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। ये वाक्यों में जैसे के तैसे ही प्रयुक्त होते हैं, अव्यय कहलाते हैं। जैसे- जब, तब, कब, कहाँ, क्यों, कैसे, किसने, इधर, उधर, ऊपर, अरे, तथा, और, किन्तु, परन्तु, लेकिन क्योंकि, यहाँ, वहाँ, केवल, इत्यादि।

-विकार के आधार पर शब्द दो प्रकार के होते हैं-
  1. विकारी शब्द- जिनके रूप में परिवर्तन हो सकता है। (जैसे- संज्ञा, सर्वनाम, क्रिया, विशेषण इत्यादि।) 
  2. अविकारी शब्द जिनके रूप में कोई परिवर्तन नहीं होता है। (जैसे- क्रिया विशेषण, संबंधबोधक संज्ञा, समुच्चयबोधक, विस्मयादिबोधक, निपात इत्यादि।) 

अव्यय की पहिचान-

अव्यय की परिभाषा के अनुसार अव्यय ऐसे शब्दों को कहते हैं जिनका रूप परिवर्तित नहीं होता है। इसे पहिचानने के लिए वाक्य में दिए गए सभी शब्दों को अलग-2 लिखकर उनका रूप परिवर्तित करके देखें और इस प्रक्रिया में  जिस शब्द का रूप परिवर्तित नहीं हो सकता है उसे छाँट कर अलग कर दें। वह शब्द ही अव्यय है। 

इसे एक उदाहरण की सहायता से समझते हैं-  

1. वह आज जाएगा। 

           (शब्दपरिवर्तित रूप)

  • वहवो, उसका, उनका…….. 
  • जाएगाजा, जाता, जाना…… 
  • आज (परिवर्तित नहीं किया जा सकता है)

अव्यय के प्रकार-

हिंदी भाषा में अव्यय के पाँच प्रकार हैं-

  1. क्रिया विशेषण (ADVERB)
  2. संबंध बोधक (PREPOSITION)
  3. समुच्चय बोधक (CONJUCTION)
  4. विस्मयादि बोधक (EXCLAMATORY)
  5. निपात (PARTICLE)

क्रिया विशेषण(ADVERB)

क्रिया विशेषण (ADVERB)-

ऐसे अव्यय शब्द जो क्रिया की विशेषता( समय, स्थान, शैली, और परिमाण) बताते हैं क्रिया विशेषण कहलाते हैं। 

उदाहरण-  

  • वह आज आएगा। यहाँ आज आने की विशेषता बता रहा है।)

क्रिया विशेषण के प्रकार-

1. प्रयोग के आधार पर क्रिया विशेषण के प्रकार-

  1. साधारण क्रिया विशेषण 
  2. संयोजक क्रिया विशेषण 
  3. अनुबद्ध क्रिया विशेषण 
1. साधारण क्रिया विशेषण-

जिस क्रिया विशेषण का प्रयोग वाक्य में स्वतंत्र (इसका संबंध उपवाक्य से नहीं रहता है) रूप से होता होता है, उसे साधारण क्रिया विशेषण कहते हैं।  

 वाक्य उदाहरण-  

  • हाय ! मेरा पर्स कहाँ गया।
  • रामू , जल्दी घर आओ।
  • अब करें तो क्या करें?
2. संयोजक क्रिया विशेषण-

जिस क्रिया विशेषण का संबंध उपवाक्य के साथ रहता है, उसे संयोजक क्रिया विशेषण कहते हैं।  

 वाक्य उदाहरण-  

  • जब बारिश होंगी तब आओगे क्या?
  • जहाँ सद्बुद्धि तहाँ समृद्धि। 
  • जैसा काम वैसा दाम। 
3. अनुबद्ध क्रिया विशेषण-

जिस क्रिया विशेषण का प्रयोग निश्चय के लिए होता है, उसे अनुबद्ध क्रिया विशेषण कहते हैं।  

 वाक्य उदाहरण-  

  • मैंने जल तक नहीं पिया।  
  • मैंने आपके आने तक इंतजार किया। 

2. रूप के आधार पर क्रिया विशेषण के प्रकार-

  1. मूल 
  2. यौगिक 
  3. स्थानीय 
1. मूल क्रिया विशेषण-

जिस क्रिया विशेषण का प्रयोग उसके मूल रूप में किया जाता है, उसे मूल क्रिया विशेषण कहते हैं।  

 वाक्य उदाहरण-  

  • आप कब आओगे।  
  • मैं अचानक डर गया। 
2. यौगिक क्रिया विशेषण-

जिस क्रिया विशेषण का निर्माण दूसरे शब्द या प्रत्यय जोड़ने से होता है, उसे यौगिक क्रिया विशेषण कहते हैं। जैसे- दिन+भर=दिनभर, वहाँ+तक=वहाँ तक, चपके+से= चुपके से, रात+भर=रात भर आदि।   

 वाक्य उदाहरण-  

  • वह दिनभर खेलता रहा।  
  • मैं वहाँ तक जा रहा हूँ। 
  • उसने चुपके से हमला किया। 
  • वह रात भर सिसकती रही। 
3. स्थानीय क्रिया विशेषण-

जिस क्रिया विशेषण का प्रयोग बिना रूपांतर, विशेष स्थान पर होता है, उसे स्थानीय क्रिया विशेषण कहते हैं। 

 वाक्य उदाहरण-  

  • विराट कोहली बड़े क्रिकेटर हैं।   
  • वह दौड़ कर आता है। 

3. अर्थ के आधार पर क्रिया विशेषण के प्रकार-

अर्थ के अनुसार क्रिया विशेषण चार प्रकार के होते हैं-

  1. कालवाचक 
  2. स्थानवाचक
  3. रीतिवाचक
  4. परिमाणवाचक   
1. कालवाचक-

इस क्रिया विशेषण से क्रिया के होने के समय का बोध होता है। जैसे- आज, कल, परसों, अब, कब, जब, तब, पीछे, पहले, सदा, अभी, तुरन्त, प्रतिदिन, दिनभर, लगातार, सबेरे, बार-बार, प्रायः, बहुधा आदि।  

 > कभी-कभी एक कालवाचक क्रिया विशेषण दो बार एक साथ प्रयुक्त होता है और कभी-2 दो अलग कालवाचक क्रिया विशेषण एक साथ प्रयुक्त होते हैं।   

  • मैं अभी-अभी बाहर से आया हूँ। (यहाँ अभी क्रिया विशेषण शब्द दो बार आया है) 
  • मैं आज-कल बाहर नहीं जाता हूँ। (यहाँ आज, कल दो क्रिया विशेषण शब्द एक साथ प्रयुक्त हुए हैं) 

वाक्य उदाहरण-  

  • श्याम आज बाजार जाएगा।
  • वसुधा कल हमारे घर आएगी।
  • चमेली परसों घूमने जाएगी।
  • अब बहुत देर हो चुकी है।
  • आप कब आओगे।
  • जब जाना हो मुझे बता देना।
  • आप लाइन में थे, तब मैं आपके पीछे खड़ा था।
  • मैं आपसे पहले आया था।
  • गरिमा सदा घूमती रहती है।
  • मालिक ने नौकर को अभी बुलाया है।
  • तुम तुरन्त हाजिर हो।
  • प्रतिदिन अनाज के दाम गिरते जा रहे हैं।
  • वह दिनभर खाता रहता है।
  • वह लगातार मेरा पीछा कर रहा था।
  • भानू सबेरे जल्दी उठ जाता है।
  • मरीज की तबियत बार-बार बिगड़ रही है।
  • वह प्रायः यहाँ आता रहता है।
2. स्थानवाचक-

इस क्रिया विशेषण से क्रिया के होने वाले स्थान का बोध होता है। जैसे- ऊपर, नीचे, इधर-उधर, यहाँ, वहाँ, आगे, पीछे, बाहर, भीतर, अगल-बगल, जहाँ, तहाँ, चारों ओर आदि।  

वाक्य उदाहरण-  

  • श्याम ऊपर रहता है। 
  • वसुधा नीचे गई है।
  • चमेली इधर-उधर घूमती रहती है।
  • आप यहाँ खड़े हो जाइये।
  • राम वहाँ गया है।
  • वह आगे गया है।
  • रमेश पीछे बैठा है।
  • रमा बाहर घूम रही है।
  • कल्याण भीतर घुस गया है।
  • वह मेरे अगल-बगल घूमता रहता है।
  • आपको जहाँ जाना है जाइये।
  • चारों ओर अंधकार छाया हुआ है।
3. रीति(शैली)वाचक-

इस क्रिया विशेषण से क्रिया की रीति (क्रिया के होने की शैली) का बोध होता है। जैसे- धीरे-धीरे, अचानक, सचमुच, अवश्य ही, अतः, इसलिए, मात्र, भर, फटाफट, जैसे-तैसे, कैसे, यथा संभव, आजीवन, निःसंदेह आदि।  

वाक्य उदाहरण-  

  • श्याम धीरे-धीरे खाता है। 
  • मुरली अचानक मेरे घर आ गया।
  • वह पछी सचमुच उड़ता है।
  • रंगीली अवश्य ही इस प्रतियोगिता में भाग लेगी।
  • अतः आप यहाँ पधारिए।
  • इसलिए वह गुस्सा हुआ था।
  • मुझे मात्र दस रुपये की जरूरत है।
  • मुट्ठी भर सैनिकों ने किले पर कब्जा कर लिया।
  • फटा-फट खाना खा लो।
  • जैसे-तैसे मैं यह कार्य पूरा कर पाया हूँ।
  • आप यहाँ तक कैसे पहुँचे।
  • यथा संभव यह कार्य पूरा हो जाएगा।
  • निःसंदेह वह आज आएगा।
4. परिमाणवाचक-

इस क्रिया विशेषण से क्रिया के परिमाण (मात्रा या संख्या) का बोध होता है। जैसे- बहुत, बड़ा, कुछ, थोड़ा, काफी, बिल्कुल, अत्यंत, तिल-तिल, एक-एक करके, अधिक, अधिकाधिक, केवल, यथेष्ट, थोड़ा-थोड़ा, अतिशय, लगभग, प्रायः आदि।  

वाक्य उदाहरण-  

  • श्याम बहुत खाता है। 
  • राम बड़ा तेज दौड़ता है।
  • तुम कुछ काम क्यों नहीं करते।
  • रमा थोड़ा आराम कर लिया करो।
  • मैं तिल-तिल मर रहा हूँ।
  • एक-एक करके दौड़िए।
  • वह लगभग मर गया था।
  • यह अत्यंत सुखद अनुभव है।

संबंधबोधक (PREPOSITION)

संबंधबोधक (PREPOSITION)-

ऐसे अव्यय शब्द जो संज्ञा/सर्वनाम का अन्य संज्ञा या सर्वनाम के साथ संबंध का बोध करते हैं संबंधबोधक कहलाते हैं। जैसे- के पास, की ओर, की जगह, दूर के, दूर से, के आगे, के साथ इत्यादि।  

संबंधबोधक के प्रकार-

1. व्युत्पत्ति के आधार पर संबंधबोधक के प्रकार-

व्युत्पत्ति के आधार पर संबंधबोधक अव्यय 2 प्रकार के होते हैं-
 
  1. मूल संबंधबोधक  
  2. यौगिक संबंधबोधक  
1. मूल संबंधबोधक-

मूल संबंधबोधकों की संख्या बहुत कम है। जैसे- बिना, पर्यंत, नाईं, समेत, पूर्वक इत्यादि।  

2. यौगिक संबंधबोधक-

यौगिक संबंधबोधक विभिन्न प्रकार के शब्द भेदों से बनते हैं।  

जैसे-  

  • संज्ञा से- और, अपेक्षा, वास्ते, पलटे, विषय, लेखे इत्यादि। 
  • विशेषण से- जैसे, ऐसा, योग्य, सरीखे, तुल्य, समान, उलटा इत्यादि। 
  • क्रिया से- लिए मारे, जान करके इत्यादि। 
  • क्रिया विशेषण से- भीतर, बाहर, पास, परे, पीछे, यहाँ, ऊपर इत्यादि। 

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