एक सवाल है…
जिंदगी भर का, एक अनसुलझा सा सवाल है।
जलता रहे मसाल सा, वह ऐसी मिसाल है।।
देता रहा जवाब जो, बचपन के हर सवाल का।
बुढ़ापे में आज वह, खुद एक सवाल है।। ….. 1
करता पूरी ख्वाहिशें, घर के हर एक शख्स की।
कभी शिकायत नहीं, उसे किसी की शिकायत से।।
उसका अथक प्रयास ही, इसकी एक मिसाल है।
आज उसकी खुद की जरूरतें भी, खुद एक सवाल हैं।। .….2
खुश करने में सभी को, वह व्यस्त है इतना।
कि जिंदगी से उसकी, खुशियाँ हुई गुमनाम हैं।।
सब खुश रहें समझता यही, खुशकिस्मती है मेरी।
आज भी उसकी खुशियाँ, बस एक सवाल हैं ।। ….3
कल तक था जवाब जो, बचपन के हर सवाल का।
आज उसकी जिंदगी, बन गई एक सवाल है।।
क्या उसके सवालों का भी, जवाब है कहीं।
या फिर इस जहांन में, पिता शब्द ही सवाल है।। ….4