नित अपने कर्तव्य मार्ग पर आगे बढ़ते जाना है…
नन्ही सी किलकारी से, तुम आँगन को किलकाती हो ।
जीवन में करुणा, श्रद्धा, और भाव दया के लाती हो ।।
घर को उपवन सा सजा, रोज उसको महकाती हो ।
जीवन से भटके इस नर को, तुम सच्ची राह दिखाती हो ।।
नित अपने कर्तव्य मार्ग पर आगे बढ़ती जाती हो…… 1
रक कोख में अपनी इस नर को, तुम जीवन नया दिलाती हो ।
कर्तव्य मार्ग पर अटल रहे, तुम उसको पाठ पढ़ाती हो ।।
अपने जीवन को ताक पे रख, हर संभव कष्ट उठाती हो ।
हँस-हँस कर आगे जीवन में, फिर भी तुम बढ़ती जाती हो ।।
नित अपने कर्तव्य मार्ग पर आगे बढ़ती जाती हो …..2
भटके नर को पथ पर लाना, जीवन का पाठ पढाना तुम ।
जब-जब संसार विपथ हो तब, उसको सन्मार्ग दिखाना तुम ।।
दुर्गा, चंडी, लक्ष्मीबाई, तुम मदर टेरेसा की रूपक हो ।
शक्ति की अपर खदान हो तुम, पर संयम सब को दिखलाती हो ।।
नित अपने कर्तव्य मार्ग पर आगे बढ़ती जाती हो……3
जो अत्याचारी जुर्म करे, तुम्हें उसको पाठ पढ़ाना है ।
अस्मिता पर तुम्हारी जो वार करे, तुम्हें उसको सबक सिखाना है ।।
जो तेरा अपमान करे उसे, उसका स्थान दिखाना है ।।
नित अपने कर्तव्य मार्ग पर आगे बढ़ते जाना है ।।
नित अपने कर्तव्य मार्ग पर आगे बढ़ते जाना है……4