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कारक क्या है? -

जब संज्ञा या सर्वनाम का संबंध वाक्य के दूसरे शब्दों के साथ जोड़ने के लिए जिन शब्दों का प्रयोग किया जाता है उन्हें कारक कहते हैं।

“या”

जब संज्ञा या सर्वनाम का संबंध वाक्य के दूसरे शब्दों के साथ जोड़ा जाता है तब उनके बीच कुछ प्रत्ययों का प्रयोग किया जाता है। इन प्रत्ययों को कारक कहते है।  

 उदाहरण-  

  • कैकेई ने राजा दशरथ से अपने तीन वचन माँगे। ( यहाँ ने, से, अपने कारक सूचक विभक्तियाँ हैं।

कारक की परिभाषा-

संज्ञा या सर्वनाम का संबंध वाक्य के दूसरे शब्दों से स्थापित करने के लिए जिन शब्दों का प्रयोग होता है उन्हें कारक, परसर्ग या विभक्ति चिन्ह कहते हैं।

 उदाहरण-  

  • राम ने रावण का वध किया। ( यहाँ ने, का कारक शब्द, राम के द्वारा रावण के वध का संबंध स्थापित कर रहे हैं।

कारक-

हिन्दी भाषा में आठ कारक हैं-

  1. कर्ता कारक 
  2. कर्म कारक 
  3. करण कारक 
  4. संप्रदान कारक 
  5. अपादान कारक 
  6. संबंध कारक 
  7. अधिकरण कारक 
  8. संबोधन कारक 

विभक्ति-

कारक को सूचित करने के लिए संज्ञा या सर्वनाम के आगे जो चिन्ह लगाए जाते हैं उन्हें विभक्तियाँ कहते है। 

कारक – विभक्ति/परसर्ग 

कर्ता – शून्य, ने (को, से द्वारा)

कर्म – शून्य, को 

करण – से, द्वारा (साधन या माध्यम)

संप्रदान – को, के लिए 

अपादान – से (अलग होने का बोध)

संबंध – का, के, की /ना, ने, नी / रा, रे, री 

अधिकरण – में, पर 

संबोधन – हे, हो, अरे, अजी, अहो    

कारकों के प्रकार-

कारक आठ प्रकार के होतें हैं- 

1. कर्ता कारक-

वाक्य में जो संज्ञा या सर्वनाम क्रिया को संम्पन्न करता है उसे सूचित करने वाले संज्ञा के रूप को कर्ता कारक कहते है-  (सूचक-ने) 

 नोट- कर्ता कारक का विभक्ति चिन्ह “ने” होता है।

 उदाहरण-  

  • बंदर ने केला खाया। 
  • हनुमान ने लंका में आग लगा दी। 
नोट- जब क्रिया वर्तमान/भविष्य काल में होती है तो “ने” विभक्ति का लोप हो जाता है। 

उदाहरण-  

  • राम अगरा जाता है। 
  • वह खाना खाएगा। 

 

2. कर्म कारक-

वाक्य में जिस संज्ञा या सर्वनाम पर क्रिया (काम/कर्म) का प्रभाव पड़ता है उसे कर्म कारक कहते है-  (सूचक-को) 

 नोट- कर्म कारक का विभक्ति चिन्ह “को” होता है।

टिप्स- जब वाक्य में क्रिया से पहले क्या/किसको, शब्द लगाने से जो उत्तर मिलता है उसे कर्म कारक कहते हैं। 

उदाहरण-  

  • शिक्षक छात्रों को पढ़ा रहे हैं।  
  • लड़के पुस्तकों को पढ़ा रहे हैं। 
नोट- कुछ स्थानों पर “को” लुप्त रहता है।
  • छात्र पुस्तक पढ़ते हैं। 
  • वह खाना खाता है। 

3. करण कारक-

वाक्य में संज्ञा के जिस रूप(साधन/माध्यम) से क्रिया का सम्पादन होता है उसे करण कारक कहते है-  (सूचक-से) 

 नोट- करण कारक का विभक्ति चिन्ह “से” होता है।

 

उदाहरण-  

  • राम ने रावण को बाण से मारा।  
  • ड्राइवर ने साइकिल को ट्रक से टक्कर मार दी। 
नोट- कुछ स्थानों पर “से” लुप्त रहता है।
  • चोर ने उसे चाकू मारा।   
  • किसान हल जोतता है। 

4. संप्रदान कारक-

जब कर्ता किसी व्यक्ति, वस्तु या उद्देश्य के लिए क्रिया का सम्पादन करता है उसे संप्रदान कारक कहते है-  (सूचक-को/के लिए) 

 नोट- संप्रदान कारक का विभक्ति चिन्ह “को/के लिए” होता है।

टिप्स- संप्रदान कारक का विभक्ति चिन्ह “को” वाक्य में के लिए का बोध कराता हैं। 
 

उदाहरण-  

  • माँ ने बच्चों के लिए खिलौने खरीदे।  
  • हमें हमेशा गरीबों को दान देना चाहिए। 
नोट- कुछ स्थानों पर “को/के लिए” लुप्त रहता है।
  • राजा नहाने गया।   
  • अध्यापक गाँव में पढ़ाने आते है। 

5. अपादान कारक-

वाक्य में जब संज्ञा या सर्वनाम से किसी व्यक्ति, वस्तु या क्रिया के अलग होने या उत्पन्न होने का बोध हो उसे अपादान कारक कहते है-  (सूचक-से) 

 नोट- अपादान कारक का विभक्ति चिन्ह “से” होता है।

टिप्स- करण कारक में “से” का बोध सहायक साधन के रूप में तथा अपादान कारक में “से” का बोध अलग करने के लिए होता हैं। 
 

उदाहरण-  

  • आसमान से ओले गिर रहे हैं ।  
  • पतझड़ में पेड़ से पत्ते गिरते हैं ।

6. संबंध कारक-

वाक्य में एक संज्ञा या सर्वनाम का दूसरे संज्ञा या सर्वनाम से संबंध स्थापित करने वाले शब्द को संबंध कारक कहते हैं-  (सूचक-का, के, की/ ना, ने, नी/ रा, रे, री) 

 नोट- संबंध कारक के विभक्ति चिन्ह का, के, की/ ना, ने, नी/ रा, रे, री होते है। 

उदाहरण-  

  • रमेश रामजी लाल का पुत्र है।  
  • अयोध्या श्री रामचन्द्र जी की नागरी है।

7. अधिकरण कारक-

वाक्य में संज्ञा का वह रूप जिससे क्रिया के आधार (स्थान, समय, या अवसर) का बोध होता है अधिकरण कारक कहलाता है-  (सूचक- में, पर) 

 नोट- अधिकरण कारक के विभक्ति चिन्ह “में, पर” होते हैं। 

उदाहरण-  

  • पक्षी पेड़ पर रहते हैं।  
  • रमेश दिल्ली में रहते हैं।

8. सम्बोधन कारक-

संज्ञा या सर्वनाम के उस रूप को, जिसके द्वारा किसी को बुलाने सावधान करने या संबोधित करने का बोध होता है सम्बोधन कारक कहलाता है-  (सूचक- हे, हो, अरे, अजी, अहो) 

 नोट- सम्बोधन कारक के विभक्ति चिन्ह हे, हो, अरे, अजी, अहो होते हैं। 

उदाहरण-  

  • हे भगवान ! मुझे माफ कर दो।  
  • अरे बेटा, इधर आ।
  • अजी ! सुनते हो। 
  • अहो भाग्य हमारे, आप यहाँ पधारे। 

संज्ञा या सर्वनामों की कारक रचना-

1. "बालक" की कारक रचना-

कारक

कर्ता 

कर्म 

करण 

संप्रदान 

अपादान 

संबंध 

 

अधिकरण 

 

सम्बोधन 

 

 

 एकवचन

बालक 

बालक ने 

बालक को 

बालक से 

बालक को 

बालक से 

बालक का,

 के, की

बालक में 

बालक पर 

हे बालक 

 

बहुवचन 

बालक 

बालकों ने 

बालकों को 

बालकों से 

बालकों को 

बालकों से 

बालकों का,

 के, की 

बालकों में 

बालकों पर 

हे बालको 

2. "लड़का" की कारक रचना-

कारक

कर्ता 

 

कर्म 

करण 

संप्रदान 

अपादान 

संबंध 

 

अधिकरण 

 

सम्बोधन 

 

 एकवचन

लड़का

लड़के ने 

लड़के को 

लड़के से 

लड़के को 

लड़के से 

लड़के का,

 के, की

लड़के में 

लड़के पर 

हे लड़के

 

बहुवचन 

लड़के

लड़कों ने 

लड़कों को 

लड़कों से 

लड़कों को 

लड़कों से 

लड़कों का,

 के, की 

लड़कों में 

लड़कों पर 

हे लड़को

3. "राजा" की कारक रचना-

कारक

कर्ता 

 

कर्म 

करण 

संप्रदान 

अपादान 

संबंध 

 

अधिकरण 

 

सम्बोधन 

 

 एकवचन

राजा

राजा ने 

राजा को 

राजा से 

राजा को 

राजा से 

राजा का,

 के, की

राजा में 

राजा पर 

हे राजा

 

बहुवचन 

राजा

राजाओं ने 

राजाओं को 

राजाओं से 

राजाओं को 

राजाओं से 

राजाओं का,

 के, की 

राजाओं में 

राजाओं पर 

हे राजाओ 

4. "मुनि" की कारक रचना-

कारक

कर्ता 

 

कर्म 

करण 

संप्रदान 

अपादान 

संबंध 

 

अधिकरण 

 

सम्बोधन 

 

 एकवचन

मुनि 

मुनि ने 

मुनि को 

मुनि से 

मुनि को 

मुनि से 

मुनि का,

 के, की

मुनि में 

मुनि पर 

हे मुनि 

 

बहुवचन 

मुनि 

मुनियों ने 

मुनियों को 

मुनियों से 

मुनियों को 

मुनियों से 

मुनियों का,

 के, की 

मुनियों में 

मुनियों पर 

हे मुनियो

5. "माली" की कारक रचना-

कारक

कर्ता 

 

कर्म 

करण 

संप्रदान 

अपादान 

संबंध 

 

अधिकरण 

 

सम्बोधन 

 

 एकवचन

माली 

माली ने 

माली को 

माली से 

माली को 

माली से 

माली का,

 के, की

माली में 

माली पर 

हे माली 

 

बहुवचन 

माली 

मालीयों ने 

मालीयों को 

मालीयों से 

मालीयों को 

मालीयों से 

मालीयों का,

 के, की 

मालीयों में 

मालीयों पर 

हे मालीयो

6. "साधु" की कारक रचना-

कारक

कर्ता 

 

कर्म 

करण 

संप्रदान 

अपादान 

संबंध 

 

अधिकरण 

 

सम्बोधन 

 

 एकवचन

साधु 

साधु ने 

साधु को 

साधु से 

साधु को 

साधु से 

साधु का,

 के, की

साधु में 

साधु पर 

हे साधु 

 

बहुवचन 

साधु 

साधुओं ने 

साधुओं को 

साधुओं से 

साधुओं को 

साधुओं से 

साधुओं का,

 के, की 

साधुओं में 

साधुओं पर 

हे साधुओ

7. "डाकू" की कारक रचना-

कारक

कर्ता 

 

कर्म 

करण 

संप्रदान 

अपादान 

संबंध 

 

अधिकरण 

 

सम्बोधन 

 

 एकवचन

डाकू 

डाकू ने 

डाकू को 

डाकू से 

डाकू को 

डाकू से 

डाकू का,

 के, की

डाकू में 

डाकू पर 

हे डाकू 

 

बहुवचन 

डाकू 

डाकुओं ने 

डाकुओं को 

डाकुओं से 

डाकुओं को 

डाकुओं से 

डाकुओं का,

 के, की 

डाकुओं में 

डाकुओं पर 

हे डाकुओ 

8. "बहिन" की कारक रचना-

कारक

कर्ता 

 

कर्म 

करण 

संप्रदान 

अपादान 

संबंध 

 

अधिकरण 

 

सम्बोधन 

 

 एकवचन

बहिन 

बहिन ने 

बहिन को 

बहिन से 

बहिन को 

बहिन से 

बहिन का,

 के, की

बहिन में 

बहिन पर 

हे बहिन 

 

बहुवचन 

बहिन 

बहिनों ने 

बहिनों को 

बहिनों से 

बहिनों को 

बहिनों से 

बहिनों का,

 के, की 

बहिनों में 

बहिनों पर 

हे बहिनो

9. "शाला" की कारक रचना-

कारक

कर्ता 

 

कर्म 

करण 

संप्रदान 

अपादान 

संबंध 

 

अधिकरण 

 

सम्बोधन 

 

 एकवचन

शाला 

शाला ने 

शाला को 

शाला से 

शाला को 

शाला से 

शाला का,

 के, की

शाला में 

बहिन पर 

हे शाला 

 

बहुवचन 

शाला 

शालाओं ने 

शालाओं को 

शालाओं से 

शालाओं को 

शालाओं से 

शालाओं का,

 के, की 

शालाओं में 

शालाओं पर 

हे शालाओ

10. "बुढ़िया" की कारक रचना-

कारक

कर्ता 

 

कर्म 

करण 

संप्रदान 

अपादान 

संबंध 

 

अधिकरण 

 

सम्बोधन 

 

 एकवचन

बुढ़िया 

बुढ़िया ने 

बुढ़िया को 

बुढ़िया से 

बुढ़िया को 

बुढ़िया से 

बुढ़िया का,

 के, की

बुढ़िया में 

बुढ़िया पर 

हे बुढ़िया 

 

बहुवचन 

बुढ़ियाँ

बुढ़ियों ने 

बुढ़ियों को 

बुढ़ियों से 

बुढ़ियों को 

बुढ़ियों से 

बुढ़ियों का,

 के, की 

बुढ़ियों  में 

बुढ़ियों पर 

हे बुढ़ियो

11. "शक्ति" की कारक रचना-

कारक

कर्ता 

 

कर्म 

करण 

संप्रदान 

अपादान 

संबंध 

 

अधिकरण 

 

सम्बोधन 

 

 एकवचन

शक्ति 

शक्ति ने 

शक्ति को 

शक्ति से 

शक्ति को 

शक्ति से 

शक्ति का,

 के, की

शक्ति में 

शक्ति पर 

हे शक्ति 

 

बहुवचन 

शक्तियाँ  

शक्तियों ने 

शक्तियों को 

शक्तियों से 

शक्तियों को 

शक्तियों से 

शक्तियों का,

 के, की 

शक्तियों में 

शक्तियों पर 

हे शक्तियो

12. "देवी" की कारक रचना-

कारक

कर्ता 

 

कर्म 

करण 

संप्रदान 

अपादान 

संबंध 

 

अधिकरण 

 

सम्बोधन 

 

 एकवचन

देवी 

देवी ने 

देवी को 

देवी से 

देवी को 

देवी  से 

देवी का,

 के, की

देवी में 

देवी पर 

हे देवी 

 

बहुवचन 

देवियाँ  

देवियों ने 

देवियों को 

देवियों से 

देवियों को 

देवियों से 

देवियों का,

 के, की 

देवियों में 

देवियों पर 

हे देवियो

13. "धेनु" की कारक रचना-

कारक

कर्ता 

 

कर्म 

करण 

संप्रदान 

अपादान 

संबंध 

 

अधिकरण 

 

सम्बोधन 

 

 एकवचन

धेनु 

धेनु ने 

धेनु को 

धेनु से 

धेनु को 

धेनु से 

धेनु का,

 के, की

धेनु में 

धेनु पर 

हे धेनु 

 

बहुवचन 

धेनुएँ

धेनुओं ने 

धेनुओं को 

धेनुओं  से 

धेनुओं को 

धेनुओं से 

धेनुओं  का,

 के, की 

धेनुओं में 

धेनुओं  पर 

हे धेनुओ

14. "बहू" की कारक रचना-

कारक

कर्ता 

 

कर्म 

करण 

संप्रदान 

अपादान 

संबंध 

 

अधिकरण 

 

सम्बोधन 

 

 एकवचन

बहू 

बहू ने 

बहू को 

बहू से 

बहू को 

बहू से 

बहू का,

 के, की

बहू में 

बहू पर 

हे बहू 

 

बहुवचन 

बहुएँ

बहुओं ने 

बहुओं को 

बहुओं से 

बहुओं को 

बहुओं  से 

बहुओं का,

 के, की 

बहुओं में 

बहुओं पर 

हे बहुओ

15. "गौ" की कारक रचना-

कारक

कर्ता 

 

कर्म 

करण 

संप्रदान 

अपादान 

संबंध 

 

अधिकरण 

 

सम्बोधन 

 

 एकवचन

गौ 

गौ ने 

गौ को 

गौ से 

गौ को 

गौ से 

गौ का,

 के, की

गौ में 

गौ पर 

हे गौ 

 

बहुवचन 

गौएँ

गौओं ने 

गौओं को 

गौओं से 

गौओं को 

गौओं से 

गौओं  का,

 के, की 

गौओं में 

गौओं पर 

हे गौओ

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