विशेषण क्या है?-(Visheshan kya hai)
वह शब्द जो संज्ञा या सर्वनाम शब्दों की विशेषता (छोटा, बड़ा, काला, भारी, वह, सब, एक ) बताते है उन्हें विशेषण कहते हैं।
उदाहरण-
- यह घर छोटा है। ( यहाँ छोटा घर की विशेषता बता रहा है।)
- यह बड़ा जानवर है।( यहाँ बड़ा जानवर की विशेषता बता रहा है।)
- उसके पास काला कुत्ता है।( यहाँ काला कुत्ते की विशेषता बता रहा है।)
- यह भारी सामान है।( यहाँ भारी सामान की विशेषता बता रहा है।)
- वह गाय मेरी है ।( यहाँ वह गाय मेरी है निश्चितता बताकर, विशेषता बता रहा है।)
विशेष्य(Visheshya)-
जिस संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बतायी जाती है वह विशेष्य कहलाता है।
उदाहरण-
- यह घर छोटा है। ( यहाँ घर विशेष्य और छोटा विशेषण है।)
- यह बड़ा जानवर है।( यहाँ जानवर विशेष्य और बड़ा विशेषण है।)
- उसके पास काला कुत्ता है।( यहाँ कुत्ता विशेष्य और काला विशेषण है।)
विशेषण के प्रकार(Types of visheshan)-
हिन्दी भाषा में विशेषणों के चार मुख्य प्रकार हैं-
- गुणवाचक विशेषण
- संख्यावाचक विशेषण –(i) निश्चित संख्यावाचक, (ii) अनिश्चित संख्यावाचक
- परिमाणवाचक विशेषण
- सार्वनामिक विशेषण –(i) मूल सार्वनामिक, (ii) यौगिक सार्वनामिक
(1) गुणवाचक विशेषण-
वह शब्द जो “संज्ञा या सर्वनाम”(विशेष्य) के गुण, दोष, रंग, रूप, आकार, अवस्था, दशा, दिशा, स्वाद, गंध आदि का बोध कराते हैं गुणवाचक विशेषण कहलाते है।
उदाहरण-
- यह उपहार सुंदर है।
- हाथी काला है।
- यह बड़ा जानवर है।
- हिमालय उत्तर दिशा में स्थित है।
- गुणबोधक- सुंदर, श्रेष्ट, शिष्ट, अच्छा इत्यादि।
- दोषबोधक- गंदा, नीच, उद्दंड, बुरा इत्यादि।
- रंगबोधक- लाल, हरा, नीला, पीला, काला, गोरा इत्यादि।
- आकारबोधक- लंबा, चौड़ा, चौकोर, गोल, छोटा, मोटा इत्यादि।
- अवस्थाबोधक- गीला, सूखा, नम, जला इत्यादि।
- दशाबोधक- निरोगी, रोगी, दुबला, पतला, गरीब, अमीर, भला, स्वस्थ्य इत्यादि।
- दशाबोधक- निरोगी, रोगी, दुबला, पतला, गरीब, अमीर, भला, स्वस्थ्य इत्यादि।
- दिशाबोधक- पूरब, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण इत्यादि।
- स्वादबोधक- खट्टा, मीठा, नमकीन, तीखा, कसैला इत्यादि।
- स्पर्शबोधक- मुलायम, कठोर, मखमली इत्यादि।
- गंधबोधक- खुसबू, बदबू, सुगंध इत्यादि।
- कालबोधक- नया, पुराना, ताजा, प्राचीन, अगला, पिछला इत्यादि।
(2) संख्यावाचक विशेषण-
वह शब्द जो “संज्ञा या सर्वनाम”(विशेष्य) की संख्या का बोध कराते हैं संख्यावाचक विशेषण कहलाते है।
उदाहरण-
- भारतीय सेना में दश लाख सैनिक हैं।
- वह दूसरी बार फैल हुआ है।
- राम हरबार उत्तीर्णआता है।
- घड़ी में पौने दो बजे हैं।
- हमारी क्रिकेट टीम पाकिस्तान खेलने गई है।
संख्यावाचक विशेषण दो प्रकार के होते हैं-
- निश्चित संख्यावाचक विशेषण
- अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण
(1) निश्चित संख्यावाचक विशेषण –
वह विशेषण शब्द जो “संज्ञा या सर्वनाम”(विशेष्य) की निश्चित संख्या का बोध कराते हैं निश्चित संख्यावाचक विशेषण कहलाते हैं।
(जैसे- एक घर, पाँचवी गली, चौगुना दाम इत्यादि।)
निश्चित संख्यावाचक विशेषण छः प्रकार के होते हैं-
i). पूर्णांकबोधक विशेषण- इससे पूर्ण संख्या का बोध होता है। (जैसे- पाँच सैनिक,दस रुपये, एक आदमी इत्यादि।)
वाक्य उदाहरण-
- द्वार पर पाँच सैनिक तैनात हैं।
- मुझे दस रुपये चाहिए।
- हमें एक आदमी और चाहिए।
ii). अपूर्णांकबोधक विशेषण- इससे अपूर्ण संख्या का बोध होता है। (जैसे- डेढ़, पौने दो, आधा, चौथाई इत्यादि।)
वाक्य उदाहरण-
- मुझे डेढ़ किलो मिठाई चाहिए।
- घड़ी में पौने दो बज चुके हैं।
- उसे आधा हिस्सा ही मिलेगा।
- वह चौथाई जमीन का हकदार है
iii). क्रमवाचक विशेषण- इस विशेषण से विशेष्य के क्रम का बोध होता है। (जैसे- प्रथम, द्वितीय, चतुर्थ, पंचम इत्यादि।)
वाक्य उदाहरण-
- वह कक्षा में हमेशा प्रथम आता है।
- हम रेल की द्वितीय श्रेणी से दिल्ली गए।
- वह चतुर्थ कक्षा में पढ़ता है।
- रुद्र दौड़ में पंचम स्थान पर रहा।
iv). आवृत्तिवाचक विशेषण- इस विशेषण से विशेष्य की आवृत्ति का बोध होता है। (जैसे- दुगना, चौगुना, दस गुना इत्यादि।)
वाक्य उदाहरण-
- रमेश के पास हमसे दुगना सामान है।
- उसके पास हमसे चौगुनी संपत्ति है।
- वह हमसे दस गुना अधिक ऋणी है।
v). समूहवाचक विशेषण- इस विशेषण से विशेष्य के समूह का बोध होता है। (जैसे- एक दर्जन, बीस भुजायें, दस शीश, बीस चोर, दस जवान इत्यादि।)
वाक्य उदाहरण-
- मामाजी एक दर्जन केला लेकर आये।
- रावण की बीस भुजायें थी।
- रावण के दस शीश थे।
- आज रात को मैंने बीस चोर देखे।
- सरकारी वाहन में बीस जवान सवार थे।
vi). प्रत्येकवाचक/प्रत्येकबोधक विशेषण- इस विशेषण से विशेष्य के लिए कई वस्तुयों में से प्रत्येक का बोध होता है। (जैसे- प्रत्येक दिन, हर दसवां आदमी, हर दूसरा बच्चा, दो-दो घंटे, सवा-सवा सेर, पौने दो-दो मन, एक-एक हजार इत्यादि।)
वाक्य उदाहरण-
- यह बच्चा प्रत्येक दिन पढ़ता है।
- भारत का हर दसवां आदमी मोटापे का शिकार है।
- आजकल हर दूसरा बच्चा क्रिकेट खेलता है।
- डॉक्टर ने हर दो-दो घंटे पर इन्जेक्शन लगाए।
- गरीबों को सवा-सवा सेर अनाज मुफ़्त में मिला।
- हमने पौने दो-दो मन अनाज दान में दिया।
- सरकार वृद्धों को एक-एक हजार पेंशन दे रही है।
(2) अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण –
वह विशेषण शब्द जो किसी “संज्ञा या सर्वनाम”(विशेष्य) की निश्चित संख्या का बोध नहीं कराते हैं अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण कहलाते हैं।
(जैसे- एक दूसरा, बहुत, लगभग, अधिक, करीब, कम, कुछ इत्यादि।)
अनिश्चित संख्यावाचक विशेषणों को तीन भागों में बाँट सकते है-
i). बहुत्वबोधक – जैसे- सभी, सारे, असंख्य, अनेक, बहुत इत्यादि।
वाक्य उदाहरण-
- सभी मेहमान आ चुके हैं।
- सारे आम सड़े हुए निकले।
- आसमान में असंख्य तारे हैं।
- ईश्वर के अनेक रूप हैं।
- शहर में मच्छर बहुत हैं।
ii). लगभग/करीब बोधक – जैसे- कुछ, करीब, कम, लगभग इत्यादि।
वाक्य उदाहरण-
- मुझे कुछ पैसे चाहिए।
- मैं लक्ष्य के करीब पहुँचने वाला था।
- उसे कम हिस्सा ही मिलेगा।
- वह लगभग आप जितना तेज है।
ii). दो पूर्णांक बोधक मिलकर बने विशेषण – जैसे- एक-दूसरा, दो-तीन, बीस-इक्कीस, दस-बीस, डेढ़-दो इत्यादि।
वाक्य उदाहरण-
- हम एक-दूसरे के लिए बने हैं।
- बस दो-तीन दिन में मैं अमेरिका के लिए निकलूँगा।
- हमारी ऊंचाई में बीस-इक्कीस का अंतर है।
- उसे दस-बीस रुपये देकर यहाँ से बाहर करो।
- उसे बस डेढ़-दो किलो अनाज ही मिलता है।
(3) परिमाणवाचक विशेषण-
वह शब्द जो “संज्ञा या सर्वनाम”(विशेष्य) की नाप तौल/परिमाण (निश्चित/अनिश्चित मात्रा) का बोध कराते हैं परिमाणवाचक विशेषण कहलाते है। (जैसे- कम, ज्यादा, थोड़ा, अधिक, कुछ, पूरा, अधूरा, सारा, समूचा, और, सब इत्यादि।)
उदाहरण-
- मुझे परीक्षा में कम नंबर मिले हैं।
- स्वरूप ज्यादा खाना खाता है।
- उनके पास औकात से अधिक धन है।
- मुझे कुछ फल चाहिए।
- पूरा भारत अंग्रेजों का गुलाम बन गया गया था।
- मेरा सपना अधूरा रह गया।
- आजकल सारा विश्व क्रिकेट का दीवाना हैं।
- समूचा ब्रह्मांड रहस्यमयी है।
- मुझे और पैसा कमाना है।
- इन सब पर मेरा अधिकार है।
(4)सार्वनामिक विशेषण-
जब वाक्य में सार्वनामिक शब्द संज्ञा से पहले या बाद में आकर उसकी विशेषता बताता है तो उसे सार्वनामिक विशेषण कहते हैं। (जैसे- यह पेन, वह पुस्तक, कौन आदमी, कुछ खाना इत्यादि।)
उदाहरण-
- मुझे यह पेन बहुत पसंद है।
- वह पुस्तक बहुत ही ज्ञानवर्धक है।
- कौन आदमी ऐसी घिनौनी हरकत करेगा।
- भूँखे इंसान को पेट भरने के लिए कुछ खाना चाहिए था।
>सार्वनामिक विशेषण के प्रकार-
- निश्चयवाचक- यह आदमी, ये लड़कियाँ, वह गाय, वे लड़के इत्यादि।
- अनिश्चयवाचक- कौन आदमी, कोई लड़की, कुछ काम इत्यादि।
- प्रश्नवाचक – कौन व्यक्ति, कौन अधिकारी, क्या चाहिए इत्यादि।
- संबंधवाचक – जो व्यक्ति, जो साइकिल, जो घर इत्यादि।
> व्युत्पत्ति की दृष्टि से सार्वनामिक विशेषण दो प्रकार के होते हैं-
i). मूल सार्वनामिक विशेषण – जो सर्वनाम अपने मूल रूप में संज्ञा के साथ प्रयुक्त होते हैं मूल सार्वनामिक विशेषण कहलाते हैं
वाक्य उदाहरण-
- यह घोडा तेज दौड़ता है।
- वह कार सुंदर लग रही है।
- कोई मेरी मदद करो।
- कुछ खिलाड़ी मैदान पर उपस्थित है।
ii). यौगिक सार्वनामिक विशेषण – जो सर्वनाम मूल सर्वनामों में प्रत्यय लगाने से बनते हैं और संज्ञा के साथ प्रयुक्त होते हैं यौगिक सार्वनामिक विशेषण कहलाते हैं
वाक्य उदाहरण-
- मुझे ऐसा काम कहाँ मिलेगा।
- मुझे कैसा आचरण करना चाहिए।
- उतना भला आदमी मैंने आजतक नहीं देखा।
- जैसी करनी वैसी भरनी।
>यौगिक सार्वनामिक विशेषण निम्न मूल सार्वनामिक विशेषणों से बनते हैं –
- यह- इतना, इतने, इतनी, ऐसा, ऐसी, ऐसे ।
- वह- उतना, उतने, उतनी, वैसा, वैसी, वैसे।
- जो- जितना, जितने, जितनी, जैसा, जैसी, जैसे।
- संबंधवाचक – कितना, कितने, कितनी, कैसा, कैसी, कैसे।
>संकेतवाचक विशेषण– जो सार्वनामिक शब्द संकेत द्वारा संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताते हैं संकेतवाचक विशेषण कहलाते है –
- यह मेरा मकान है
- वह गाय काली है।
- वहीं पर मेरा घर है।
- उसी घर में में रहता हूँ।
विशेषण की तुलना/अवस्थाएं -
विशेषण शब्दों द्वारा विशेष्यों की विशेषता जानी जाती है लेकिन इन विशेष्यों की तुलनात्मक ढंग से विशेषता जानने के लिए विशेषण की तुलना/अवस्थाओं का प्रयोग किया जाता है।
> विशेषणों की तीन अवस्थाएं होती है-
- मूलावस्था
- उत्तरावस्था
- उत्तमावस्था
(i) मूलावस्था – मूलावस्था में विशेषणों की तुलना नहीं की जाती बल्कि उनका मूल रूप प्रयोग करके केवल सामान्य विशेषता बताई जाती है-
वाक्य उदाहरण-
- रमेश होशियार विद्यार्थी है।
- पवित्रा सुन्दर लड़की है।
(ii) उत्तरावस्था – जब दो विशेष्यों के गुण दोषों की तुलना की जाती है उसे विशेषण की उत्तरावस्था कहते हैं।
वाक्य उदाहरण-
- रमेश नरेश से होशियार विद्यार्थी है।
- पवित्रा रेशमा से सुन्दर लड़की है।
(i) उत्तमावस्था – जब दो से अधिक विशेष्यों के गुण-दोषों की तुलना की जाती है और एक को श्रेष्ट माना जाता है उसे विशेषण की उत्तमावस्था कहते हैं।
वाक्य उदाहरण-
- रमेश सबसे होशियार विद्यार्थी है।
- पवित्रा सबसे सुन्दर लड़की है।
विशेषण की तुलना/अवस्थाओं के रूप-
विशेषण की मूलावस्था में “अधिक” और “सबसे अधिक” शब्दों को जोड़कर उत्तरावस्था और उत्तमावस्था के रूप बनाए जाते हैं ।
मूलावस्था
अच्छा
सुन्दर
बुद्धिमान
तेज
कोमल
काला
उतरावस्था
अधिक
अच्छा
अधिक
सुन्दर
अधिक
बुद्धिमान
अधिक
तेज
अधिक
कोमल
अधिक
काला
उत्तमावस्था
सबसे
अच्छा
सबसे
सुन्दर
सबसे
बुद्धिमान
सबसे
तेज
सबसे
कोमल
सबसे
काला
> इसी प्रकार तत्सम् विशेषण शब्दों की मूलावस्था में “तर” और “तम” शब्दों को जोड़कर उत्तरावस्था और उत्तमावस्था के रूप बनाए जाते हैं ।
मूलावस्था
लघु
उच्च
महत
कठोर
महान
उत्कृष्ट
सुन्दर
मधुर
तीव्र
न्यून
गुरु
विशाल
उत्
उतरावस्था
लघुतर
उच्चतर
महत्तर
कठोरतर
महानतर
उत्कृष्टतर
सुन्दरतर
मधुरतर
तीव्रतर
न्यूनतर
गुरुतर
विशालतर
उत्तर
उतमावस्था
लघुतम
उच्चतम
महत्तम
कठोरतम
महानतम
उत्कृष्टतम
सुन्दरतम
मधुरतम
तीव्रतम
न्यूनतम
गुरुतम
विशालतम
उत्तम
विशेषणों की रचना-
कुछ शब्द मूल रूप में विशेषण शब्द होते हैं और कुछ शब्दों के अन्त में (इक, इत, इम, इल, ईला, ई, ईन /ईण, ईय, वाला, आ, मान्, वान्, वती, मती, हार, हीन, शाली, युक्त) प्रत्यय जोड़कर विशेषण शब्दों की रचना की जाती है।
1. “इक” प्रत्यय लगाकर विशेषण रचना-
शब्द
शरीर
नीति
अर्थ
अंश
धर्म
अलंकार
मन
मास
दिन
इतिहास
देव
अंतर
विशेषण
शारीरिक
नैतिक
आर्थिक
आंशिक
धार्मिक
अलंकारिक
मानसिक
मासिक
दैनिक
ऐतिहासिक
दैविक
आंतरिक
2. “इत” प्रत्यय लगाकर विशेषण रचना-
शब्द
अलंकार
ध्वनि
तरंग
अंक
कुसुम
सुरभि
विशेषण
अलंकरित
ध्वनित
तरंगित
अंकित
कुसुमित
सुरभित
3. “इम” प्रत्यय लगाकर विशेषण रचना-
शब्द
रक्त
स्वर्ण
विशेषण
रक्तिम
स्वर्णिम
4. “इल” प्रत्यय लगाकर विशेषण रचना-
शब्द
जटा
उर्मि
विशेषण
जटिल
ऊर्मिल
5. “ईला” प्रत्यय लगाकर विशेषण रचना-
शब्द
चमक
नौक
विशेषण
चमकीला
नुकीला
6. “ई” प्रत्यय लगाकर विशेषण रचना-
शब्द
शहर
रोग
भीतर
भोग
निरोग
क्रोध
विशेषण
शहरी
रोगी
भीतरी
भोगी
निरोगी
क्रोधी
7. “ईन/ईण “ प्रत्यय लगाकर विशेषण रचना-
शब्द
कुल
ग्राम
विशेषण
कुलीन
ग्रामीण
8. “ईय” प्रत्यय लगाकर विशेषण रचना-
शब्द
भारत
जाति
स्वर्ग
आत्मा
स्वर्गवास
विशेषण
भारतीय
जातीय
स्वर्गीय
आत्मीय
स्वर्गवासीय
9. “वाला” प्रत्यय लगाकर विशेषण रचना-
शब्द
गाय
रथ
दूध
चाय
कचरा
विशेषण
गायवाला
रथवाला
दूधवाला
चायवाला
कचरेवाला
10. “आ” प्रत्यय लगाकर विशेषण रचना-
शब्द
सूख
भूख
प्यास
निराश
विशेषण
सूखा
भूखा
प्यासा
निराशा
11. “मान्” प्रत्यय लगाकर विशेषण रचना-
शब्द
श्री
शक्ति
बुद्धि
विशेषण
श्रीमान
शक्तिमान
बुद्धिमान
12. “वान्”(पु.) प्रत्यय लगाकर विशेषण रचना-
शब्द
गुण
धन
रूप
बल
विशेषण
गुणवान
धनवान
रूपवान
बलवान
13. “वती”(स्त्री.) प्रत्यय लगाकर विशेषण रचना-
शब्द
रूप
पुत्र
विशेषण
रूपवती
पुत्रवती
14. “मती”(स्त्री.) प्रत्यय लगाकर विशेषण रचना-
शब्द
श्री
बुद्धि
विशेषण
श्रीमती
बुद्धिमती
15. “हार” प्रत्यय लगाकर विशेषण रचना-
शब्द
पालन
सृजन
विशेषण
पालनहार
सृजनहार
16. “हीन” प्रत्यय लगाकर विशेषण रचना-
शब्द
बुद्धि
धन
दया
बल
विशेषण
बुद्धिहीन
धनहीन
दयाहीन
बलहीन
17. “शाली” प्रत्यय लगाकर विशेषण रचना-
शब्द
बल
शक्ति
वैभव
विशेषण
बलशाली
शक्तिशाली
वैभवशाली
18. “युक्त” प्रत्यय लगाकर विशेषण रचना-
शब्द
प्रयोग
उपयोग
संयोग
विशेषण
प्रयुक्त
उपयुक्त
संयुक्त
19. “रत” प्रत्यय लगाकर विशेषण रचना-
शब्द
धर्म
कार्य
सेवा
विशेषण
धर्मरत
कार्यरत
सेवारत
20. “निष्ठ” प्रत्यय लगाकर विशेषण रचना-
शब्द
धर्म
कर्म
कर्तव्य
विशेषण
धर्मनिष्ट
कर्मनिष्ट
कर्तव्यनिष्ट